रविवार, 29 सितंबर 2019

मां करणी का प्रथम अवतार है नागौर की बेटी इंद्र बाईसा पुरुष भेस में घूमती थी, नवरात्रा में देश भर से आते हैं श्रद्धालु

इंद्र बाईसा ग्राम खुड़द तहसील मकराना जिला नागौर

नागौर जिले के मकराना के पास खुर्द ऐसा गांव है जहां एक बेटी की पूजा होती है। यहां जन में बैठी इंद्र बाईसा की ख्याति राजस्थान ही नहीं, देश भर में फैली है। इस गांव में करनी माता का मंदिर है जहां करणी माता के साथ उनकी उपासक आ रही इंद्र बाईसा की पूजा भी होती है। इंद्र बाईसा को चारण समाज की कुलदेवी आवड़ माता की चौथी एवं करणी माता की प्रथम अवतार भी माना जाता है। इंद्र बाईसा का जन्म आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की नवमी को सागर दान के घर बापू बाई की कोख से हुआ।बचपन में ही रह करणी माता की अनन्य भक्त थी एवं कहीं चमत्कार दिखाएं जिससे गांव वाले उन्हें माता का अवतार मानने लग गए। धीरे-धीरे देश प्रदेश में उनकी ख्याति फैली एवं लोग उनके दर्शनों को पहुंचने लग गए। नवरात्र के 9 दिन में यहां देशभर से चारण समाज के ढाई लाख से ज्यादा लोग पहुंचते हैं। 90 साल पहले विक्रम संवत 1988 में इंद्र बाईसा ने करणी माता का मंदिर बनवाया। वह बचपन से ही पुरुष परिधान पहनती थी। उन्होंने शादी नहीं की नीमराणा की। राजकुमारी के पैर ठीक होने पर मंदिर परिसर में ही उनके लिए लकड़ी की कोटडी बनवाई गई जो आज भी मौजूद है। विक्रम संवत 2012 में 48 साल की आयु में उनके देवलोक गमन के बाद करणी माता के मंदिर के पास ही इंद्र माता का मंदिर बना। जहां आज भी उनकी पूजा पुरुष परिधान में ही होती है तथा उनकी प्राचीन मूर्तियां वह तस्वीर भी इसी वेश में मौजूद है। देशभर के कई राज घराने भी इंद्र बाईसा के दर्शनार्थ मंदिर पहुंचते हैं। नवरात्र के दौरान कई श्रद्धालु यहीं रहकर पूरे 9 दिन पूजा करते हैं। हजारों श्रद्धालु पैदल भी आते हैं। 


देशनोक करणी माता मंदिर में गर्भ गृह में प्रवेश कर पूजा की

इंद्र बाईसा ने विश्व प्रसिद्ध देशनोक के मंदिर मैं भी निज मंदिर के अंदर तक जाकर करणी माता की सेवा की थी। हालांकि देशनोक के मंदिर के नियम अनुसार निज मंदिर में पूजा करने वाले व्यक्ति के अलावा उसके परिवार का भी कोई सदस्य तक निज मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकता। लेकिन इंद्र बाईसा को करणी माता का अवतार माने जाने कारण किसी भी समय निज मंदिर में प्रवेश करने पर कोई रोक नहीं थी। 


देखिए वे अनदेखी वस्तुएं  है जो इंद्र बाईसा उपयोग में लेती थी


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 इंद्र बाईसा के मंदिर में वर्तमान में उनके भतीजे भैरू सिंह तथा उनका परिवार पूजा-अर्चना करता है, मंदिर परिसर में एक संग्रहालय बनाया गया है जिसमें इनके कपड़े, चारपाई, बिस्तर, शाल, तलवार, पगड़ी, साहित्यिक सामग्री सहित उनके द्वारा प्रयोग की गई सभी वस्तुएं सुरक्षित रखी गई है। 

शनिवार, 7 सितंबर 2019

स्वदेशी चंद्रयान तिरंगा लेकर चांद पर उतरने को तैयार, दुनिया की नजरें भारत पर

                       ...लो छू लिया चांद

             वैज्ञानिकों ने कहा- बेचैनी जरूर है, लेकिन                               किसी  बात का कोई भी नहीं

47 दिन लंबे सफर के बाद chandrayaan-2 अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। इसरो शुक्रवार और शनिवार के बीच की रात 1:30 से 2:30 के बीच चांद पर सिलेंडर की सॉफ्ट लैंडिंग करवाने की तैयारी में है। इसरो ने देर रात कहा कि चांद पर इस बहु प्रतीक्षित लैंडिंग के लिए सब कुछ तय योजना के मुताबिक चल रहा है।विक्रम के चांद पर उतरने के ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और करीब 70 स्कूली छात्र भी बेंगलुरु के इसरो सेंटर पहुंचे। चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने का प्रयास करने वाला भारत पहला देश है। देश भर में इसरो का यह मिशन सफल होने की कामना की जा रही है। इसरो के वरिष्ठ विज्ञानी ने कहा पूरी की पूरी chandrayaan-2 की टीम में बेचैनी है। यह बहुत ही जटिल ऑपरेशन है और हर काम हम पहली बार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि सेंसर, कंप्यूटर, कमांड सिस्टम सहित हर चीज सही तरीके से काम कर रही है। हमें भरोसा है कि सब कुछ सही होगा। अधिकारी ने बताया कि सॉफ्ट लैंडिंग बच्चे को पालने में लौटाने जैसी प्रक्रिया होती है। कुछ बेचैनी है लेकिन वह नहीं है। 



 दहशत के हो 15 मिनट   इसरो  चेयरमैन के. सिवन नेजिन पलों को दहशत के 15 मिनट बताया था यूं समझिए इन खास लम्हों का महत्व


चंद्रयान की लैंडिंग के आखिरी 15 मिनट को इसरो चेयरमैन के सेवन ने '15 मिनट ऑफ टेरर' कहा लेकिन विक्रम की ट्रेकिंग और कमांड से जुड़ी विज्ञानी इसे '5 मिनट ऑफ टेरर' कहते हैं। दरअसल, अंतिम 15 मिनट में विक्रम चार चरणों से गुजरेगा। 


 पहला चरण: 30 किमी ऊंची कक्षा में

30 किमी ऊंची कक्षा से उतरकर 7 पॉइंट 4 किमी की कक्षा में आएगा। इससे कुल 15 मिनट में से 10 मिनट लगेंगे। बच्चे 5 मिनट में लैंडिंग से तीन चरणों से गुजरना होगा, यही '5 मिनट ऑफ टेरर' है। 


 दूसरा चरण: 7.5 किमी से 5 किमी पर आएगा

इसमें 38 सेकंड लगेंगे रेंडर 7 पॉइंट 4 किमी से 5 किमी की ऊंचाई तक उतर चुका होगा। इस दौरान विक्रम 4 इंजन चालू होंगे, ताकि उसकी गति को 550 की में से 330 किमी प्रति घंटा किया जा सके। 


तीसरा चरण: 5 किमी से 400 मी. पर आएगा

 इसमें 89 सेकंड लगेंगे। इस दौरान विक्रम आर्बिटर से मिले high-resolution मैप और रियल टाइम में खुद ली गई तस्वीरों के मिलान करके तय करेगा कि वह सही स्थान की ओर जा रहा है या नहीं। 


चौथा चरण: 400 में से सोमी पर आएगा

 इसमें 66 सेकंड लगेंगे इस दौरान विक्रम सोमी की ऊंचाई पर जाएगा। इसके बाद 100 से 10 मी. की ऊंचाई तक उतरने में 65 सेकेंड लगेंगे। 10 मी. से चांद पर उतरने में 13 सेकंड लगेंगे। 



          4 साल चला ऐसा कड़ा अभ्यास... 

तमिलनाडु में चांद जैसे चट्टाने तलाशी बेंगलुरु में चांद सी             सत्य बनाकर हजारों बार कराई लैंडिंग

सबसे बड़ी चुनौती लैंडर और रोवर की टेस्टिंग की थी। इसके लिए चंद्रमा जैसी मिट्टी, कम ग्रेविटी का क्षेत्र, चांद पर पड़ने वाली चमकदार रोशनी पूरा वातावरण वैसा ही रीक्रिएट करने की जरूरत थी। एक तरीका तो यह था कि अमेरिका से सिम्युलेटेड लूनर सोयल लाते जो $150 किलो है। हमें 70 टन मिट्टी की जरूरत थी। लागत ज्यादा थी, तो तय हुआ कि अमेरिका से थोड़ी मिट्टी खरीदी जाए और उसका अध्ययन कर यहां ऐसी मिट्टी बनाई जाए इसरो को पता चला कि तमिलनाडु के साले में नॉर्थ साइड नाम की चट्टाने है जो चांद पर मौजूद चट्टानों से मिलती है। जिस मिट्टी के लिए ₹720000000 खर्च करने पड़ते, वह काम मुफ्त में हो गया। त्रिची के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी सालेम की पेरियार यूनिवर्सिटी और बेंगलुरु के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के वैज्ञानिकों ने उन चट्टानों को पीसकर चंद्रमा जैसी मिट्टी बना दी। वहां से ट्रकों में लादकर मिट्टी इसरो सैटेलाइट इंटीग्रेशन एंड एस्टेब्लिशमेंट बेंगलुरु लाई गई और वहां 2 मीटर मोटी से बनाई गई उतनी ही रोशनी रखी गई है जितनी चांद पर है। वहां 2015 से अब तक हजारों बार लेंडिंग कराई गयी। चांद पर गुरुत्वाकर्षण बल पृथ्वी से 6 गुना कम है। इसलिए हिलियम गैस इस्तेमाल की गई। 


                        आगे क्या होगा

          तीन योद्धा जो पता लगाएंगे कि चांद पर जीवन                                    कैसे संभव है

•  आर्बिटर: 1 साल काम करेगा सारी जानकारी इसी के                         जरिए मिलेगी

2379 किलो का आर्बिटर 2 सितंबर को अलग होकर चांद के चक्कर लगा रहा है। यह साल भर काम करेगा। इसरो को प्रज्ञान और विक्रम से मिलने वाली जानकारी आर्बिटर के जरिए ही मिलेगी। यह जांच एगा की सतह के नीचे बर्फ है या नहीं या नहीं? अगर बर्फ है तो पानी भी होगा। 

•   लेंडर (विक्रम): इसी पर सबकी नजरें,                                             जानकारियां आर्बिटर को देगा

भारत चांद पर पहली बार लैंडिंग करेगा। 1471 किलो का विक्रम प्रज्ञान को चांद पर उतारे गा इसमें तीन अहम उपकरण है, जो चांद पर भूकंप का अध्ययन करेगा। बदलते तापमान पर भी शोध करेगा। यह 14 दिन काम करेगा। 

•  रोवर (प्रज्ञान): 6 पहियों वाला है 14 दिन में सिर्फ                             500 मीटर चलेगा

विक्रम के लैंड होने के बाद 27 किलो का प्रज्ञान 3 घंटे में बाहर आएगा। यह एक्सएमई सेकंड की रफ्तार से 14 दिन में 500 मीटर की दूरी तय करेगा। उसके बाद इसका काम पूरा हो जाएगा। 2 विशेष उपकरणों के जरिए यह जानकारी जुटाकर विक्रम को देगा। विक्रम आर्बिटर को और आर्बिटर इसरो को जानकारी भेजेगा। 

डेली लाइफ में इंटेलिजेंट कनेक्टिविटी लाएगा 5G

कल्पना कीजिए कि आप अपने घर के गैराज में कार में बैठते हैं और अपने मोबाइल में एक ऐप को प्रेस करते हैं जो एक सेंसर को इंफॉर्मेशन भेजता है और गैराज का दरवाजा खुल जाता है। आप बाहर निकलते हैं कि आपको अपने फेवरेट रेस्टोरेंट्स है ब्रेकफास्ट मेन्यु का मैसेज मिलता है। आप आर्डर प्लेस कर उसे रास्ते में पिक करते हैं। उसके बाद आप यूट्यूब से वॉइस कमांड के जरिए म्यूजिक स्ट्रीम करते हैं और अपने रोड पर ट्रैफिक की स्थिति पता करते हैं। यह कल्पना, टेलीकॉम पावर टेक्नोलॉजी की मदद से निकट भविष्य में हकीकत बन सकती है। 5जी की तेज कनेक्टिविटी और डाटा स्ट्रीमिंग स्पीड आपकी कार में ऑडियो स्ट्रीमिंग शुरु करती है इंटरनेट ऑफ थिंग्स से आपके गैराज के दरवाजे को इंफॉर्मेशन मिलती है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बैकग्राउंड में काम करते हुए रेलवे इंफॉर्मेशन आप तक पहुंच जाती है जिसका उदाहरण है वह ब्रेकफास्ट मेनू जो आपके पास ठीक उस वक्त पहुंचता जब आपको उसकी जरूरत थी। यह है टेलीकॉम की संभोग बनाई सर्वश्रेष्ठ इंटेलिजेंस कनेक्टिविटी।


                                    5G लाएगा
                             डिजिटल रिवोल्यूशन



अत्याधुनिक सोल्यूशन इंट्रोड्यूस करने के अलावा 5G से बने बिजनेस मॉडल्स की राह आसान होगी जिससे टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स लोगों व इंडस्ट्रियल, कमर्शियल, एजुकेशनल, हेल्थ केयर, एग्रीकल्चरल, फाइनेंसियल, में सोशल सेक्टर को इनोवेटिव एप्लीकेशन ऑफर कर सकेंगे। 5G नेटवर्क से आईटीआई r.v.r. ब्लॉकचेन वायरलेस हाई स्पीड ब्रॉडबैंड नेटवर्क जैसी उभरती टेक्नोलॉजी की ग्रोथ भी होगी। ऑनलाइन एचडी कंटेंट कंजक्शन और डाटा ग्रोथ से बिजनेस के नए अवसरों और नई एप्लीकेशन की राह खुलेगी। 



                                      कई सेक्टर्स
                                  में मिलेंगे अवसर



5G की हाइपर कनेक्टिविटी वाइड एरिया आईयूटी नेटवर्क्स और एडवांस एआई कैपेबिलिटीज से जल्द ही हम एआर या वीआर आर हेडसेट्स से अल्ट्रा एचडी में लाइव स्पोर्ट्स का आनंद उठा रहे होंगे और एथलीट्स के पॉइंट ऑफ व्यू से भी गेम्स देख पाएंगे। हमें स्मार्ट हाई पावर ट्रेफिक कंट्रोल सिस्टम देखने को मिलेंगे जो 5G कनेक्टिविटी की मदद से गाड़ियों को धीरे या तेज चलने का निर्देश देंगे। हेल्थ केयर में 5G टेलीमेडिसिन रिमोट रिकवरी और ए आर के जरिए फिजिकल थेरेपी, प्रेसीजन सर्जरी और रिमोट रोबोटिक सर्जरी भी संभव होगी। 



                                   आंत्रप्रेन्योर्स के
                               लिए खुलेगी नई राहें 




स्मॉल बिजनेसेस और स्टार्टअप्स वाले भारत जैसे देशों में कमर्शियल रिजल्ट होने के बाद 5G स्टार्टअप्स और स्माल इकोसिस्टम प्लेयर्स और पॉजिटिव रूप से प्रभावित करेगा। कनेक्टिविटी और सर्विसेज के डिजिटलाइजेशन में वृद्धि से हम एक इंक्लूसिव सोसायटी की ओर कदम बढ़ा पाएंगे। रिमोट एरियाज में रह रहे लोग सस्ती दरों पर यूटिलिटी सर्विसेज का लाभ उठा सकेंगे। 5G की उपलब्धता से बिजनेस स्टार्ट, ऑपरेट वे बिल्ड करने के बेसिक टूल्स उपलब्ध होंगे।



                                   केवल तेज स्पीड
                                    ही नहीं है 5जी



5G केवल तेज डाटा स्पीड या कनेक्टिविटी तक ही सीमित नहीं है। इसके कई ऐसे उपयोग है जो हमारे इकोसिस्टम में शामिल होकर रोजाना की जिंदगी का हिस्सा बनने वाले हैं। एक बार कमर्शियल रूप से लागू होने के बाद 5G आम इंसान के लिए कहीं ऐसे फायदे लाएगा। जिन्हें पहले नामुमकिन माना जाता था इस हाई स्पीड नेटवर्क से ड्राइवरलेस ऑटोनॉमस व्हीकल, स्मार्ट हेल्थकेयर, स्मार्ट एग्रीकल्चर, स्मार्ट ट्रांसपोर्टेशन वे ट्रेफिक मैनेजमेंट और ब्रोंज को सपोर्ट किया जा सकेगा। 5जी की नेटवर्क इको सिस्टम से अधिक से अधिक डिवाइसेज इंटरकनेक्टेड होकर सही मायनों में इंटरएक्टिव बनेंगे। 

बुधवार, 4 सितंबर 2019

बालाकोट एयर स्ट्राइक के 6 महीने बाद मिशन के चीफ पहली बार बता रहे हैं उस रात की पूरी कहानी

एयर स्ट्राइक की रात 12:00 बजे घर पर बर्थडे केक काटा ताकि शक ना हो; फिर कंट्रोल रूम आकर मिशन पूरा किया: एयर मार्शल हरि

स्ट्राइक का कंट्रोल रूम पश्चिमी कमान के प्रमुख सी. हरि कुमार संभाल रहे थे


पाकिस्तान के बालाकोट में इस साल 25 26 फरवरी की रात जिस एयर स्ट्राइक ने दुनिया को चौंका दिया था, उसे कमांड कर रहे एयर मार्शल श्री हरि कुमार हमले के 2 दिन बाद ही रिटायर हो गए। एयर मार्शल हरी ने भास्कर से बातचीत मैं मिशन से जुड़े सदस्यों का खुलासा किया। यह एयर स्ट्राइक के बाद मीडिया को दिया उनका पहला इंटरव्यू है। 39 साल की सेवा में 3300 घंटे लड़ाकू विमान उड़ा चुके एयर मार्शल हरि के लिए सेवा के आखिरी 15 दिन सबसे रोमांचक साबित हुए। यह वह समय था, जब उन्होंने एयर स्ट्राइक की रूपरेखा तैयार की और उसे अंजाम दिया। पैसे उनसे बातचीत के संपादित अंश... 

• स्ट्राइक का फैसला कब और कैसे लिया गया? 

14 फरवरी को जब पुलवामा में हमला हुआ, उसी दिन एयरफोर्स चीफ ने मुझसे बात की। कहा कि हमारी भूमिका की जरूरत पड़ सकती है, इसलिए हमारे पास योजना होनी चाहिए। तभी कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी की बैठक हुई। उसमें एयर चीफ भी थे।चीफ ने एयर स्ट्राइक का ऑप्शन दिया था। 

• उसके बाद तैयारी कैसे शुरू हुई? 

यह बताने का कोई फायदा नहीं है। हम मिशन के लिए तैयार थे। हमें बस टारगेट चाहिए थे। 

•  आपको टारगेट (बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद का              आतंकी ठिकाना) की जानकारी कब मिली? 

एयर स्ट्राइक के लिए 25 और 26 फरवरी की रात के हुई थी। उससे ठीक 7 दिन पहले हमें इसकी जानकारी दे दी गई थी। 

•  टारगेट किसने दिया

     खुफिया एजेंसियों ने। सरकार ने आतंकी ठिकानों की                   जानकारी रो से जुटा ली थी। 

• मिशन की रात 25 फरवरी को क्या हुआ था उस समय      आप की रिटायरमेंट पार्टी भी थी 28 फरवरी को आप        रिटायर होने जा रहे थे

   दिल्ली के इंडिया गेट पर अवकाश में स्कीम है सॉन्ग निशा यादगार रहेगी। उसी रात 12:00 बजे के बाद मेरा जन्मदिन था और मेरे जहन में एक बड़ा मिशन था। रिटायरमेंट पार्टी पहले त्य थी, इसलिए मिशन की करेंसी बनाए रखने के लिए उसे स्थगित नहीं किया। पार्टी में मैंने वेटर को बुलाया और उसके कान में कहा कि लाइन को रियल (जूस और चीनी से बनी नॉन अल्कोहलिक ड्रिंक) की डबल डोज के साथ पानी देना, ताकि रंग इसकी सा दिखाई दे। पार्टी में 80 अफसर थे। एयर चीफ बीएस धनोआ मुझे लोन की तरफ ले गए मुझसे अंतिम तैयारियों के बारे में पूछा और कहा कि जब ऑपरेशन हो जाए तो फोन पर सिर्फ बंदर बोल देना। 


• मिशन को सीक्रेट रखना कितना कठिन था? 

   रात को आकाश में से लौटते समय मैंने पत्नी से कहा कि कल शायद चंडीगढ़ में विशेष बच्चों के लिए बने स्कूल के उद्घाटन में नहीं जा सकूंगा। यह सुनकर वह बहुत नाराज हो गई वह एयर फोर्स वाइफ वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष होने के नाते मेरे साथ एयरक्राफ्ट में चलने की हकदार थी। पश्चिमी कमान पहुंचते ही मैं जरूरी काम के बहाने घर से निकलकर ऑपरेशन रूम में पहुंच गया। मिशन की जानकारी मुझे एयर चीफ को देनी थी, जो एनएसए के संपर्क में थे। रात 12:00 बजे असमंजस की स्थिति बन गई, जब घर से संदेश आया कि दोस्त केक लेकर जन्मदिन मनाने पहुंचे हैं किसी को मिशन का शक न हो इसलिए मैं तुरंत घर गया। केक काटा और फिर कंट्रोल रूम पहुंचकर मिशन में जुट गया। 


• मिशन के लिए ग्वालियर से भी कुछ विमान उड़े थे, उस समय ग्वालियर में क्या हो रहा था?

गोपनीयता बनाए रखने के लिए हमने इस बात पर गहन विचार किया कि ग्वालियर में बेस के आसपास लोकल एरिया में क्या इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं जाम कर दी? जाए लेकिन आखिरकार तय किया गया कि इस तरह का कोई भी कदम गोपनीयता को खत्म कर सकता है। 


चकमा देने के लिए छह विमान दूसरी दिशा में भेजें। फिर बालाकोट में हमला किया

 

रविवार, 1 सितंबर 2019

बॉलीवुड फिल्मों का फैन हुआ अब अबू धाबी का शाही परिवार करेगा बॉलीवुड की फिल्मों में इन्वेस्टमेंट

          फिल्म इंडस्ट्री का चमकदार फ्यूचर देखकर                                  कर रहे हैं निवेश   

शुक्रवार को मोर को की नोरा फतेही ने कहा था की बॉलीवुड पर मंदी का असर नहीं पड़ेगा। दुनियाभर से लोग यहां की फिल्मों में इन्वेस्ट करने को राजी है। उनकी बात संयोग से सच हो रही है। आगाज अबू धाबी से हो रहा है। वहां के शाही परिवार के शेख तेजाब बिन खलीफा बिन हमदान अन्ना है या का गौरांग दोषी के साथ ज्वाइंट वेंचर हुआ है। वह गौरांग के बैनर से बनने वाली 3 फिल्मों में पैसे इन्वेस्ट करेंगे। उन फिल्मों का निर्देश अनीस बजमी नीरज पाठक और अब्बास मस्तान करेंगे। उनके नाम 'आंखें रिटर्न्स', 'हैप्पी एनिवर्सरी' और 'इंडियंस इन डेंजर' है। गौरांग इससे पहले 'दीवार : लेट्स ब्रिंग आवर हीरोज होम', 'बवंडर' जैसी फिल्में बना चुके हैं। उनके पिता ने सच्चा झूठा नास्तिक दिल बेटा जैसी फिल्में प्रोड्यूस की थी।



     इन तीन फिल्मों में से एक लगाएंगे अपना पैसा   
•   अनीस बजमी की 'आंखे रिटर्न्स'
•   नीरज पाठक की 'हैप्पी एनिवर्सरी'
•   अब्बास मस्तान की 'इंडियंस इन डेंजर' फिल्म                 



                   अबूधाबी और बॉलीवुड

•     06 बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग हुई अब तक अबूधाबी में
•     30 परसेंट तक रिबेट मिल जाता है फिल्मों को प्रोडक्शन पर
•     31 मिलियन यूएस डॉलर खर्च किए हैं बॉलीवुड की पिछली                पांच फिल्मों ने वहां
•      580 लोकल करो और फ्रीलांसर्स मिल जाते हैं प्रोडक्शन              हाउस को शूटिंग के दौरान



                     बिग बी आएंगे बोर्ड पर

गौरांग दोषी अपनी फिल्म आंखें रिटर्ंस के लिए अमिताभ बच्चन को बोर्ड पर ला रहे हैं। उन्होंने कहा है कि बिग बी के बिना तो उनके प्रोजेक्ट अधूरे हैं। गौरांग फिलहाल अब्बास मस्तान की फिल्म के बारे में ही ज्यादा जानकारी शेयर कर पाए उन्होंने कहा यह action-adventure और 3 स्पेस की फिल्म है। यह टिपिकल अब्बास मस्तान स्टाइल की फिल्म होगी। हम लोग फिल्मों की कास्ट लोग कर रहे हैं अगले साल से सब फ्लोर पर जाएंगी।



'पृथ्वीराज चौहान' में रानी संयोगिता का किरदार निभाएंगी मानुषी
 अक्षय कुमार की बिग बजट फिल्म 'पृथ्वीराज चौहानचौहान' के कास्टिंग लगभग फाइनल हो चुकी है। इस फिल्म में पृथ्वीराज का किरदार निभाएंगे इसमें मोहम्मद गोरी का किरदार मानव विज निभाएंगे। वैसे तो यह फिल्म पृथ्वीराज के पराक्रम को दर्शाइए, कि फिर भी इसकी कहानी में थोड़ा लव एंगल डाला जाएगा जिसमें पृथ्वीराज और कन्नौज की राजकुमारी संयोगिता के बीच की प्रेम कहानी दिखाई जाएगी। इस कहानी को पृथ्वीराज के दरबार के कवि चंदबरदाई ने उनके उपन्यास में लिखा था। सूत्रों की मानें तो संयोगिता के किरदार के लिए मिस वर्ल्ड मानुषी छिल्लर को कष्ट कर लिया गया है। अब इतिहास पर बिलीव करें तो पृथ्वीराज की 4 पत्नियां थी। हालांकि फिल्म में सिर्फ दो पत्नियों को ही दिखाया जाएगा। संयोगिता पहली पत्नी बनेगी। दूसरी पत्नी के लिए किसी टीवी एक्ट्रेस का चयन होगा। यह एक छोटा रोल होगा और उसके सिर्फ चार से पांच सीन रहेंगे। 

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खुद की कीमत (सेल्फ वैल्यू)  दुनिया में हर चीज की कीमत होती हैं , यह बात सब को पता है।  हर चीज की कीमत भी तय की जा सकती हैं , कीमत बदली भी  ज...