बुधवार, 30 अक्तूबर 2019

म्यूच्यूअल फंड पर मिल सकता है कर्ज!

क्या आप जानते हैं कि म्यूचुअल फंड में अपने निवेश पर कर्ज भी ले सकते हैं। जानिए विस्तार से।

( कभी आपको अचानक पैसों की जरूरत पड़ जाए तो चिंता करने की जरूरत नहीं है। अगर आपके पास म्यूच्यूअल फंड है तो आपकी परेशानी सुलझ सकती है। जरूरत पड़ने पर म्यूचल फंड की यूनिट के एवज में कर्ज ले सकते हैं। कैसे और किन आधार पर कर लिया जा सकता है यह सभी जानकारी इस लेख में है।

 •कैसे मिलता है कर्ज? 

  जिस प्रकार अन्य संपत्ति के बदले कर्ज लिया जाता है उसी तरह    म्यूचुअल फंड के बदले कर्ज भी लिया जा सकता है । इसके लिए बैंक में आवेदन पत्र भरकर देना होता है। इसमें निवेशक फोलियो नंबर म्यूच्यूअल फंड योजना का नाम और यूनिट की संख्या अधिक जानकारी देता है। आवेदन पत्र मिलने पर इसे फंड के पंजीयक को ग्रहण अधिकार अंकन के लिए भेजा जाता है। बैंक आपके म्यूच्यूअल फंड यूनिट की कीमत की गणना करने के बाद कर्ज की रकम निकालता है।  आपके क्रेडिट स्कोर को और कर्ज चुकाने की क्षमता को भी देखा जाता है। 

किस आधार पर मिलता है कर्ज

म्यूच्यूअल फंड यूनिट के आधार पर बैंक ऋण की मंजूरी देता है । आमतौर पर म्यूचुअल फंड के प्रकार पर ऋण निर्धारित किया जाता है। निवेशकों को इक्विटी फंड पर 50-60% और डेट फंड पर 70-80% ऋण दिया जाता है। इक्विटी फंड में ओवरड्राफ्ट की सुविधा समेत सीमित होती है। म्यूचुअल फंड यूनिट्स पर न्यूनतम 1 लाख और अधिकतम 20 लाख तक का ऋण उपलब्ध कराया जाता है। 

 यदि कर्ज नहीं चुका पाए तो? 

जैसा कि अन्य गिरवी रखी वस्तुओं पर होता है वहीं इस मामले में भी है। बैंक आपकी कर्ज न चुका पाने की स्थिति में शपथ पत्र लेता है इसके बाद आपका म्यूचल फंड बैंक का हो जाता है। यदि आप कर्ज नहीं चुका पाते हैं तो बैंक जमानत के तौर पर रखे यूनिट्स को बेच सकती है। यदि आप रकम चुका देते हैं तो म्यूच्यूअल फंड पर मालिकाना हक वापस मिल जाता है। 

 कर्ज के लिए क्यों बेहतर?

निवेशक को अपने म्यूच्यूअल फंड यूनिट्स बेचना नहीं पड़ता है यानी कि इससे आपकी वित्तीय परियोजना बरकरार रहती है। फंड यूनिट्स को कर्ज के बदले गिरवी रखने से मालिकाना हक पर कोई असर नहीं पड़ता और न ही इससे आयकर पर कोई असर होता है। फंड के बदले तुरंत कैसे मिल जाता है। इसमें निष्क्रिय पड़े यूनिवर्स का सही इस्तेमाल किया जा सकता है। यूनिट्स का मालिकाना हक निवेशक के पास रहता है। इसे सुरक्षित रिन होने के कारण ब्याज दर सामान्य तरह से कम होता है। सामान्य तौर पर निवेशक को 10 से 13% ब्याज दर चुकाना पड़ता है। ब्याज का प्रभार बैंक का या वित्तीय संस्था पर निर्भर करता है। 

•म्यूच्यूअल फंड यूनिट्स पर ऋण लेने से पहले निवेशक को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए सभी म्यूच्यूअल फंड्स ऋण के पात्र नहीं होते ऋण सिर्फ बैंक द्वारा स्वीकृत सूची के म्युचुअल फंड्स पर दिया जाता है। 
•म्यूच्यूअल फंड पर ऋण इक्विटी और डेट फंड दोनों पर दिया जाता है। 
•ऋण की अवधि के चलते यूनिवर्स को बेचा नहीं जा सकता पर उस पर मिलने वाले सभी लाभांश निवेशक को मिलते हैं।
 •बैंक उन्हीं में जो फंड यूनिवर्स पर ऋण की सुविधा देती है जो शेयर बाजार में सूचीबद्ध हो और जिसमें रेपो रेट यानी पुनर खरीदी की सुविधा उपलब्ध हो। 
•अगर मैचुअल फंड यूनिट्स में लॉक इन अवधि की धारा है तो लॉक इन अवधि समाप्त होने पर ही ऋण का प्रस्ताव मंजूर किया जाता है। ऋण की राशि नेट ऐसेट वैल्यू या पुनर खरीद की कीमत पर निर्भर करती है। 

 ऐसे करें आवेदन

म्यूच्यूअल फंड के बदले कर्ज पाने के लिए सबसे पहले ओवरड्राफ्ट सुविधा के साथ करंट अकाउंट या चालू खाता खोलना पड़ता है। यूनिट्स के आधार पर बैंक ऋण की सीमा तय करती है। इसके लिए निवेशक ओवरड्राफ्ट सुविधा का इस्तेमाल कर सकता है। कई ऑनलाइन पोर्टल कर्ज के प्रिय अप्रूवल की सुविधा देते हैं। यदि आपके पास म्यूच्यूअल फंड डीमेट फॉर्म में है तो यह काम काफी आसान हो सकता है। वहीं यूनिट्स फिजिकल फॉर्म में है तो कर्ज लेने की प्रक्रिया थोड़ी लंबी हो सकती। 

शनिवार, 26 अक्तूबर 2019

आधार से लिंक होगी प्रॉपर्टी

 देश में पहली बार संपत्ति स्वामित्व का मॉडल कानून बनेगा, ड्राफ्ट तैयार जल्द कैबिनेट में आएगा; जमीन, मकान या फ्लैट की खरीद - फरोख्त में फर्जीवाड़ा रोकने और बेनामी संपत्ति का पता लगाने में आसानी होगी। 

 केंद्र सरकार मॉडल कानून बनाकर राज्यों को भेजेगी, वही लागू करेंगे

अचल संपत्ति के स्वामित्व के लिए अब उसे आधार से लिंक कराना होगा। केंद्र सरकार पहली बार संपत्ति के स्वामित्व के लिए कानून ला रही है। ड्राफ्ट तैयार हो चुका है। 5 सदस्यों की एक्सपर्ट कमेटी भी बन चुकी है जो राज्यों में समन्वय करेगी। जमीन से जुड़े मामले राज्यों के अधिकार क्षेत्र में है, इसलिए केंद्र मॉडल कानून बनाकर राज्यों को देगा। 19 राज्यों में एनडीए की सरकार है। संभव है कि ज्यादातर राज्यों में कानून लागू हो जाएगा। नए कानून से संपत्ति की खरीद-फरोख्त में फर्जीवाड़ा रुकेगा। बेनामी संपत्तियों का भी खुलासा होगा। जो व्यक्ति अचल संपत्ति आधार से लिंक कर आएगा, उसकी संपत्ति पर कब्जा होता है तो उसे छुड़ाना सरकार की जिम्मेदारी होगी या फिर सरकार मुआवजा देगी। आधार लिंक नहीं कराने पर सरकार जिम्मेदारी नहीं लेगी। 


नए मॉडल कानून के फायदों के बारे में वह सब कुछ जो आप जानना चाहते हैं

स्वामित्व की प्रक्रिया क्या होगी? 

• रजिस्ट्रार ऑफिस जाकर खसरा नंबर के आधार पर टाइटल (स्वामित्व) जनरेट कराना होगा। फिर उसे आधार से लिंक कराना होगा। 

 अभी क्या व्यवस्था है? 

• जमीन से जुड़ा कोई विवाद होता है तो खुद ही मालिकाना हक साबित करना पड़ता है। 
• सिर्फ कागजात के आधार पर रजिस्ट्री होती है
• खरीद - बिक्री के समय दोनों पक्षों में क्या शर्ते तय हुई, सरकार अभी इसकी गारंटी नहीं लेती। 

 आगे क्या व्यवस्था होगी? 

• सरकार जमीन के स्वामित्व के गारंटी लेगी। रजिस्ट्री भी स्वामित्व स्थापित कराने के बाद होगी। 
• सरकार खरीद - बिक्री की शर्तों की जांच करेगी। 
• संपत्ति पर किसी का कब्जा हुआ तो उसे खाली कराना या मुआवजा देना सरकार की जिम्मेदारी होगी। 
• जमीन का रिकॉर्ड अपडेट होगा। इससे कोई संपत्ति अगर आदि भी बेची जाती है तो रजिस्ट्री होते ही रिकॉर्ड अपने आप ही अपडेट हो जाएगा। 
• बायोमेट्रिक से घर बैठे ही संपत्ति बेच सकेंगे लेकिन, रजिस्ट्री में 1 महीने का समय लगेगा। 

 नया कानून लागू कैसे होगा? 

• दो तरीकों से। पहला- इंक्रीमेंटल यानी बेचते समय या ट्रांसफर होते समय आधार लिंक होगा। 
• दूसरा- जिलावार लागू कराया जा सकता है। 

संपत्ति मालिक को क्या फायदा होगा? 

• संपत्ति की धोखाधड़ी की गुंजाइश नहीं बचेगी। 
• संपत्ति मालिक को अवैध कब्जे से सुरक्षा मिलेगी। 
• लैंड टाइटल कराने पर आसानी से लोन मिलेगा। 
• जमीन संबंधी कानूनी मदद के लिए सिंगल विंडो होगी। 
• डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर लेने वाले पहचाने जाएंगे। 

 सरकार को कैसे फायदा होगा? 

• संपत्ति की सूचनाएं पारदर्शी होगी। संपत्ति मालिक और संपत्ति संबंधी सूचनाएं रियल टाइम अपडेट होगी। 
• संपत्ति से जुड़े मुकदमे कम होंगे क्योंकि आधार से लिंक होने के बाद जांच बेहद आसान हो जाएगी। 
• योजना या नीति बनाने के लिए सटीक आंकड़े उपलब्ध होंगे। सरकार का दखल भी घटेगा। 


संपत्ति से जुड़े एक पॉइंट 30 करोड़ के इन्हें 5 साल में निपटाने के लिए ट्रिब्यूनल और हाईकोर्ट में स्पेशल बेंच बनेगी

देशभर की अदालतों में संपत्ति विवाद से जुड़े 1 पॉइंट 30 करोड मुकदमे लंबित है। इस वजह से कुल जीडीपी का करीब 1 पॉइंट 3 प्रतिशत हिस्सा संपत्ति में लॉक है। मुकदमे जल्द खत्म हो, इसके लिए ड्राफ्ट में कुछ प्रावधान बनाए गए हैं। सभी के अदालतों से ट्रिब्यूनल और अपील ट्रिब्यूनल में ट्रांसफर किए जाएंगे। हर हाई कोर्ट में एक स्पेशल बेंच बनाई जाएगी। सभी मुकदमे निपटाने के लिए 5 साल का समय निर्धारित किया गया है। एक्सपर्ट कमेटी के एक सदस्य ने बताया कि आधार लिंक कराना वैकल्पिक होगा। अगर लोग चाहते हैं कि सरकार उनकी संपत्ति की गारंटी ले तो आधार लिंक कराना ही होगा। 

शुक्रवार, 25 अक्तूबर 2019

5 दिवसीय महापर्व का पहला दिन धनतेरस आज और कल तो अरुण चतुर्दशी वह दिवाली एक साथ

महालक्ष्मी की आराधना का पर्व दीपावली हर्षोल्लास से मनाने की तैयारियां पूरी हो गई है। पांच दिवसीय दीपोत्सव शुक्रवार से शुरू होगा। दीपोत्सव के इस त्योहार दिवाली पर इस बार कहीं अनूठे संयोग को का संगम होगा धनतेरस इस बार 2 दिन रहेगी इसके बाद रूप चतुर्दशी वे दिवाली 27 अक्टूबर को मनाई जाएगी। ज्योतिषियों के अनुसार पांच दिवसीय दीपोत्सव में इस बार धनतेरस शुक्रवार शाम से शुरू होगी। कारण कि इस दिन द्वादशी प्रीति शाम 7:11 बजे तक है ऐसे में इसके बाद शुरू होगी, जो शनिवार को दोपहर 3:50 बजे तक रहेगी। दोनों दिन खरीदारी के लिए सबसे शुभ रहेंगे। इस दिन सोने चांदी की कोई चीज या नए बर्तन खरीदने को शुभ माना गया है। मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी के साथ धन्वंतरी और कुबेर की पूजा की जानी चाहिए। क्योंकि कुबेर का जोड़ घटाव रखने वाले हैं तो वहीं धनवंतरी ब्रह्मांड के सबसे बड़े वेद है। इस बार 27 अक्टूबर को रूप चतुर्दशी है दिवाली एक ही दिन मनाई जाएगी। धनतेरस के चलते बाजार में चहल-पहल बढ़ी है। घरों में बिजली की रंग-बिरंगी रोशनी से सजावट की जा रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, रेडीमेड गारमेंट, बर्तनों की दुकान और स्मार्टफोन की बिक्री का ग्राफ बढ़ रहा है ।अगले 3 दिन बाजार के लिए धन वर्षा के होंगे। 


आगे क्या : अगले 3 दिन बाजार के लिए धन वर्षा के                    होंगे

1. परंपरा : आभूषणों की होगी बिक्री

     धनतेरस के मौके पर परंपरागत रूप से सोने-चांदी के आभूषणों की खरीद होती है। बाजारों में आभूषणों के अलावा सोने-चांदी के बर्तन कलाकृतियां आदि दुकानों में सजाई गई है। खासतौर से चांदी की थाली पूजा के बर्तन, आकर्षण का केंद्र रहेंगे। धनतेरस के दिन बाजार में बर्तनों की दुकानों पर भी भीड़ बढ़ेगी। 

2. तकनीक : गैजेट्स का भी जादू

     नई पीढ़ी धनतेरस अपने मुताबिक मनाने को उत्सुक है। त्योहार के मौके पर युवा कपड़े और मोबाइल खरीदने के प्लानिंग में है। बाजार में मोबाइल शॉप पर स्मार्टफोन की नई रेंज मौजूद है। इधर, एलईडी टीवी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की भी नहीं श्रंखला ग्राहकों को लुभा रही है। 

3. अपनों के लिए उपहारों की खरीद

दीपावली का त्योहार खुशियां लेकर आता है तो ऐसे मौके पर अपनों के लिए उपहार देने का भी चलन है, शहर के गिफ्ट शॉप्स पर फोटो फ्रेम, सजावटी समान, गुलदस्ते, ग्रीटिंग कार्ड, सौंदर्य प्रसाधन, प्राची उनकी नई रेंज उपलब्ध है। यहां दीपावली और धनतेरस से पूर्व ही ग्राहकों की भीड़ देखी जा रही है। 

4. बहीखाता : कंप्यूटर युग में भी मांग

व्यापारियों में पारंपरिक बही खातों की मांग बरकरार है। पुस्तक विक्रेताओं ने मांग के अनुरूप पीले पन्नों की परंपरागत बही, पुस्तक का कहार में खाता बही और रजिस्टर प्रमुखता से सजाए हैं। बाजारों में हिसाब के लिए दुकानों में कंप्यूटर लगा रखे हैं लेकिन फिर भी व्यापारी धनतेरस के दिन शुभ मुहूर्त में बहीखाता खरीदते हैं। 

self value😎😎😎

खुद की कीमत (सेल्फ वैल्यू)  दुनिया में हर चीज की कीमत होती हैं , यह बात सब को पता है।  हर चीज की कीमत भी तय की जा सकती हैं , कीमत बदली भी  ज...